Village bhabhi chudai sex story भाभी की तंग लाल चूत

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Village bhabhi chudai sex story भाभी की तंग लाल चूत

Village bhabhi chudai sex story

Bhabhi devar sex story, Lal chut sex story, Young boy bhabhi chudai sex story: मेरा नाम मीरा है। अभी मैं 34 साल की हूं। यह कहानी उस समय की है जब मैं 21 साल की थी। यह स्टोरी आप पढ़ रहे हैं sexstoryqueen.com पर | Village bhabhi chudai sex story

मेरा पति दिल्ली में रहता था। शादी के पंद्रह दिन बाद ही वह दिल्ली चला गया। मैं अपनी बूढ़ी सास के पास गांव में रह गई। घर में मेरा एक देवर भी था लेकिन वह बाहर रहता था। बस मैं और सास ही घर में थे।

मुझे चुदाई का चस्का लग चुका था। शादी के बाद तो मैं खूब चुदी थी। पति के साथ हर रात और कई बार दिन में भी मैंने भरपूर मजा लिया था। लेकिन पति के जाने के बाद मैं तड़प रही थी। जैसे शेर के मुंह में खून लग जाए तो वह शिकार को नहीं छोड़ता, वैसे ही मेरे साथ हो रहा था। मेरी चूत में लंड जैसे ही पहली बार गया था, मैं बहुत चुदक्कड़ हो गई थी। अब वह खालीपन मुझे हर पल सताता था।

जब तक पति मेरे साथ था, मैं दिन में भी चुदाई का बहाना ढूंढती रहती थी। कभी कहती कि पीठ दुख रही है, तो कभी सिर दर्द का बहाना बनाती। मौका मिलते ही मैं खुद पति पर चढ़ जाती और उसे चोद देती। वह हाथ जोड़कर कहता रहता, “मीरा, रात में प्लीज, रात में।” लेकिन मैं नहीं मानती थी। मैं उसे लिपटकर चूमती, उसका लंड पकड़कर सहलाती और खुद ही अपनी चूत में ले लेती। दिन में चुदाई का मजा कुछ और ही होता था। Village bhabhi chudai sex story

पति दिल्ली चला गया। मैं दुल्हन बनी खिड़की से झांकती रहती। घर में कोई और नहीं था जिससे बात कर सकूं। सुबह से शाम तक मैं बाहर निहारती रहती। उस समय मेरे पास मोबाइल भी नहीं था। पति सप्ताह में एक बार कॉल करता था। उसके लिए मुझे पड़ोस की चाची के यहां जाना पड़ता। उनकी लैंडलाइन पर बात होती लेकिन वहां खुलकर कुछ कह नहीं पाती थी। चाची पास में बैठी रहतीं, इसलिए मन मसोसकर रह जाती। पति से बात करके भी मन नहीं भरता था।

मेरी खिड़की के सामने एक मकान था। उसमें शशांक नाम का लड़का रहता था। वह ग्रेजुएशन कर रहा था। काफी सुंदर था, गोरा, लंबा और भोला-भाला सा चेहरा। मैं उसे निहारती रहती। उसकी कमीज से छाती की हल्की उभार दिखती, उसकी मुस्कान देखकर मेरी सांसें तेज हो जातीं।

फिर वह मुझे देखने लगा। मैं हंस देती। मोहल्ले में सब मिलजुलकर रहते थे। सबके यहां आना-जाना था। पूरा मोहल्ला एक परिवार जैसा था। फिर वह मुझसे बात करने लगा। “क्या हाल है भाभी?” वह मुस्कुराकर पूछता। सास ने भी कहा, “शशांक, कभी भाभी से मिलने आ जाया करो। बेचारी बोर हो जाती है।” शशांक ने कहा, “क्यों नहीं, आज ही आता हूं।” Village bhabhi chudai sex story

उस दिन से शशांक आने-जाने लगा। वह मेरे घर आता, थोड़ी देर बैठता, बातें करता और चला जाता। लेकिन वह कभी ज्यादा मजाक नहीं करता था। हमेशा सम्मान से अच्छी-अच्छी बातें करता रहता। जैसे पढ़ाई की बात, मौसम की बात या मोहल्ले की छोटी-मोटी खबरें। मुझे लगा कि यह लड़का इतना भोला है कि ऐसे सीधे-सीधे नहीं मानेगा।

मैंने एक दिन हल्के से उकसाते हुए कहा, “शशांक, मेरी एक छोटी बहन है, काफी सुंदर है। क्या तुम उससे शादी करोगे?”

वह थोड़ा शरमा गया और बोला, “नहीं भाभी, अभी तो पढ़ाई पूरी कर रहा हूं। शादी की सोच भी नहीं है अभी।” लेकिन उसकी आंखों में एक चमक आ गई। उसके बाद से शादी, गर्लफ्रेंड, प्यार-मोहब्बत वाली बातों में उसका इंटरेस्ट बढ़ने लगा। अब वह पहले से ज्यादा देर तक बैठता। बातों को घुमाकर ऐसे सवाल पूछता जैसे “भाभी, आपकी शादी कैसे हुई थी?” या “लव मैरिज अच्छी होती है या अरेंज्ड?” Village bhabhi chudai sex story

उसे देखते ही मेरी चूत में खुजली होने लगती। उसकी आवाज सुनते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती। मैं उसे किसी भी हाल में पाना चाह रही थी। हर पल सोचती रहती कि काश यह मुझे छू ले, मुझे चोद ले। चुदना चाह रही थी, बहुत ज्यादा।

तभी सास मायके चली गईं। उनके भाई का देहांत हो गया था। घर में मैं पूरी तरह अकेली रह गई। सास जाते समय पड़ोस की चाची से कह गई थीं, “रात को मेरे घर आ जाना, बहू अकेली है।”

एक गर्मी का दिन था। धूप इतनी तेज थी कि बाहर निकलना मुश्किल था। जोर की हवा चल रही थी, धूल उड़ रही थी। सड़क पर कहीं कोई दिखाई नहीं दे रहा था।

शशांक कॉलेज से लौटा। मैंने खिड़की से उसे देखा और आवाज लगाई, “शशांक, मन नहीं लग रहा। आ जाओ जरा।”

वह मुस्कुराया, घर गया, कपड़े बदले, खाना खाया और जल्दी से मेरे घर आ गया। मुझे देखते ही खुशी हुई। मन में लगा कि आज जरूर कुछ होगा, आज चुदाई होगी। Village bhabhi chudai sex story

हम बात करने लगे। मैं दरवाजे के पास जमीन पर चटाई बिछाकर बैठ गई। वह अंदर पलंग पर बैठ गया। बातें चल रही थीं। अचानक वह उठ खड़ा हुआ और बोला, “भाभी, अभी आ रहा हूं।”

जैसे ही वह दरवाजे के पास मेरे करीब पहुंचा, मैंने हिम्मत करके उसकी पैंट के ऊपर से उसके लंड को छू दिया। हल्के से हाथ फेर दिया।

वह झटके से पीछे हट गया। उसका चेहरा लाल हो गया। मैं ठहाका मारकर हंसने लगी। वह बोला, “भाभी, ये क्या कर रही हो? ये गलत बात है।”

मैंने शरारत से कहा, “क्यों, कुछ होता है क्या? या मेरा छूना अच्छा नहीं लगा? या अपनी आने वाली पत्नी के लिए बचा के रखोगे?”

वह बोला, “प्लीज भाभी, मजाक मत करो।” और फिर बाहर जाने लगा।

मैंने फिर से हाथ बढ़ाया और इस बार उसके लंड को अच्छे से पकड़ लिया। उसका लंड पहले से ही सख्त हो चुका था, पैंट के ऊपर से ही साफ महसूस हो रहा था। मैंने कसकर पकड़ा और हल्का सा दबाया। वह कह रहा था, “छोड़ो भाभी, छोड़ो प्लीज।” लेकिन उसकी आवाज में कमजोरी थी। मैं हंस रही थी। फिर मैंने छोड़ दिया। Village bhabhi chudai sex story

वह थोड़ा रुक गया और बोला, “अगर मैं भी तुम्हारा पकड़ लूं तो?”

मैंने चुनौती दी, “पकड़ के दिखाओ ना।” मैं चाह रही थी कि वह मेरी चूचियां मसले, दबाए, मुझे छुए। लेकिन वह अभी भी हिचक रहा था। मैंने कहा, “इतनी हिम्मत कहां है तुममें?”

इतना कहते ही वह तेजी से मेरी तरफ बढ़ा। मैं हंसते हुए दौड़कर अंदर कमरे में चली गई। वह मेरे पीछे दौड़ा। मैं कमरे में भाग रही थी, वह मुझे पकड़ने की कोशिश कर रहा था। आखिरकार उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया। उसके हाथ आगे आए और उसने मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। ब्लाउज के ऊपर से ही जोर से मसलने लगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं कह रही थी, “छोड़ो ना प्लीज, छोड़ो ना।” लेकिन मेरी आवाज में मजाक ज्यादा था, विरोध कम। Village bhabhi chudai sex story

उसका खड़ा लंड मेरी गांड के बीच सट रहा था। मैं महसूस कर रही थी कि कितना मोटा और सख्त है। मेरी साड़ी का आंचल नीचे गिर गया। उसने मेरे ब्लाउज के ऊपरी हुक खोलने शुरू किए। वह कामयाब हो गया। टाइट ब्लाउज में मेरी चूचियां उसके हाथों में आ गईं। उसने जोर से दबाया।

मैं शांत हो गई। उसने धीरे-धीरे सारे हुक खोल दिए। मैंने उस दिन ब्रा नहीं पहनी थी। मेरी चूचियां पूरी तरह खुल गईं। वह आगे आया। मेरी चूचियों को ध्यान से देखने लगा। दोनों हाथों से दबाने लगा, सहलाने लगा। उसकी आंखों में हैरानी और उत्सुकता थी। शायद वह पहली बार किसी औरत की चूचियां इतने करीब से देख रहा था। Village bhabhi chudai sex story

मैं उसे हवसी नजरों से देख रही थी। मेरी आंखों में शरारत और भूख साफ झलक रही थी। उसकी नजरें मेरी खुली चूचियों पर टिकी थीं, और उसका चेहरा लाल हो चुका था।

फिर उसने हकलाते हुए, लेकिन सीधे पूछ लिया, “भाभी… चोदने दोगी?”

मैंने बिना एक पल सोचे, मुस्कुराकर कहा, “हां… बिल्कुल।” मैं तो यही चाह रही थी, दिन-रात यही सोच रही थी।

मैंने जल्दी से बाहर झांका। गर्मी की वजह से सड़क सूनी पड़ी थी, कोई दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने पीछे का दरवाजा जाकर अच्छे से बंद कर दिया और कुंडी लगा दी। कोई आ जाने का डर अब नहीं था।

वापस आई तो शशांक खड़ा था, अपना लंड पैंट के बाहर निकालकर हाथ में पकड़े हुए। उसका लंड सख्त, लंबा और मोटा था, सिरा लाल होकर चमक रहा था। वह थोड़ा घबराया हुआ लेकिन उत्सुक भी लग रहा था।

मैं दौड़कर उसके पास गई और उससे पूरी तरह लिपट गई। मेरी नंगी चूचियां उसके सीने से सट गईं। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जोर से चूमने लगी। मेरी जीभ उसके मुंह में डालकर चूसने लगी। मैं खिलाड़ी थी, अनुभवी थी, लेकिन वह पूरी तरह अनाड़ी था। वह बस मेरे साथ ताल मिलाने की कोशिश कर रहा था। Village bhabhi chudai sex story

मैंने उसे थोड़ा पीछे धकेला और खुद खटिया पर लेट गई। साड़ी को कमर तक ऊपर कर दिया। पेटीकोट भी ऊपर करके फेंट दिया। मेरी चूत अब पूरी तरह खुल गई थी। उसमें हल्की-सी काली झांट थीं, लेकिन चूत की लाल-गुलाबी दरार साफ दिख रही थी। मैंने दोनों पैर फैला दिए, घुटने मोड़कर। मेरी चूत की दरार खुलकर सामने आ गई, थोड़ा गीली भी हो चुकी थी।

शशांक बड़े ध्यान से देख रहा था। उसकी सांसें तेज हो गई थीं। मेरी मोती-मोटी गोरी जांघें, चिकनी त्वचा, सब कुछ उसे पागल कर रहा था। वह घुटनों के बल मेरे पास आया और मेरी चूत को करीब से निहारने लगा, जैसे पहली बार देख रहा हो।

फिर वह मेरे ऊपर लेट गया। उसका वजन मुझे अच्छा लग रहा था। उसने मेरे होंठ फिर से चूसने शुरू किए। मैंने एक हाथ से उसके सिर को पकड़ा और दूसरे हाथ से उसके लंड को पकड़ लिया। लंड गरम था, सख्त था। मैंने उसे अपनी चूत के मुंह पर रखा, दरार पर रगड़ा। फिर बोली, “मार धक्का… अंदर डाल दे।” Village bhabhi chudai sex story

उसने थोड़ा कांपते हुए धक्का दिया। लंड का सिरा मेरी चूत में घुसा। मुझे एक झटका लगा, संतुष्टि मिली। फिर उसने और जोर से धकेला, पूरा लंड अंदर चला गया। मेरी चूत पूरी तरह भर गई।

वह अब लंड को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा। पहले धीमे, फिर तेज। मैं गांड उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थी। लंड मोटा था, लंबा था, मेरी चूत की दीवारों को अच्छे से रगड़ रहा था। काफी मजा आ रहा था। जवान लंड था, पहली बार मेरी चूत में घुस रहा था, इसलिए उसकी हरकतें और भी उत्तेजक लग रही थीं। Village bhabhi chudai sex story

लेकिन वह ज्यादा देर नहीं टिक पाया। नवसिखिया था, अनाड़ी था। कुछ ही मिनटों में उसकी सांसें तेज हो गईं, शरीर कांपने लगा और वह झड़ गया। गरम रस मेरी चूत में भर गया।

मैंने अभी और चाहा था। मैंने दो-तीन तेज झटके खुद दिए, अपनी चूत को उसके लंड पर रगड़ा। उसी में मैं भी झड़ गई। पूरा शरीर सुन्न हो गया, मैं निढाल होकर लेट गई।

वह उठकर खड़ा हो गया। मैंने हांफते हुए कहा, “बैठो जरा।” वह मेरे पास बैठ गया। उसकी नजरें मेरी चूत पर, जांघों पर, चूचियों पर टिकी थीं। मेरी चूत से उसका रस थोड़ा-थोड़ा बह रहा था, जांघों पर फैल रहा था। वह बस निहार रहा था।

फिर उसने मुस्कुराकर कहा, “भाभी, काफी मजा आया। इतना मजा कभी नहीं आया।”

मैंने कहा, “किसी को मत बताना। और रात को आना। आज रात को खूब मजा दूंगी।”

वह सहमति में सिर हिलाया और चुपके से चला गया।

रात को मैं शशांक का इंतजार करते-करते थक गई थी। लालटेन की मद्धम रोशनी कमरे में फैली हुई थी। खिड़की खुली छोड़ी थी ताकि हवा आती रहे। मैं बिस्तर पर लेटी सोच रही थी कि कब आएगा। आंखें भारी हो गईं और मैं सो गई।

अचानक छोटे-छोटे पत्थरों की आवाज आई। खिड़की पर टप-टप गिर रहे थे। मैं चौंककर उठ बैठी। दिल की धड़कन तेज हो गई। मैंने खिड़की की तरफ देखा। बाहर अंधेरे में शशांक खड़ा था। वह छोटे पत्थर फेंक रहा था ताकि मुझे जगाए, लेकिन आवाज ज्यादा न हो। Village bhabhi chudai sex story

मैं फौरन उठी। कमरे से बाहर आई। आंगन में चाची सो रही थीं, जैसे सास ने उन्हें कहा था। उनकी सांसें नियमित चल रही थीं, वे गहरी नींद में थीं। मैं चुपके से पीछे के दरवाजे की तरफ गई। कुंडी खोली और धीरे से दरवाजा खोला। शशांक अंदर आ गया। मैंने तुरंत दरवाजा बंद किया और अंदर कमरे में ले आई। कमरे का दरवाजा भी लगा दिया। अब कोई नहीं आ सकता था।

मैंने बिना कुछ कहे साड़ी का पल्लू नीचे किया और पूरी साड़ी उतार दी। फिर ब्लाउज के हुक खोल दिए। मेरी चूचियां फिर से खुलकर सामने आ गईं। शशांक की आंखें फैल गईं। वह मेरे पास आया और झुककर मेरी एक चूची मुंह में ले ली। उसने जोर से चूसना शुरू किया। जीभ से निप्पल को घुमाने लगा, दांतों से हल्का सा काटा। मुझे सिहरन हो रही थी। मैंने उसके सिर पर हाथ रखा, बालों में उंगलियां फेरते हुए सहलाने लगी। उसकी सांसें गरम मेरी चूचियों पर पड़ रही थीं। Village bhabhi chudai sex story

मैं खटिया पर लेटने लगी। लेकिन शशांक ने रोक लिया। उसने धीरे से कहा, “नहीं भाभी, खटिया पर नहीं। आवाज होगी। नीचे चटाई बिछा लो।”

मैं समझ गई। खटिया पुरानी थी, चुदाई में चरमराएगी और चाची जाग सकती थीं। मैंने फौरन चटाई बिछाई। उस पर लेट गई। पैर फैलाए, घुटने मोड़ लिए। मेरी चूत फिर से उसके सामने थी, पहले से गीली और तैयार।

शशांक ने अपनी पैंट उतारी। उसका लंड पहले से ही खड़ा और सख्त था, नसें उभरी हुईं, सिरा चमक रहा था। वह मेरे पास आया, लेकिन मैंने उसे रोक लिया। मैं अनुभवी थी, जानती थी कि जल्दबाजी में मजा आधा रह जाता है। मैंने उसके हाथ पकड़े और उसे चटाई पर बैठा दिया। Village bhabhi chudai sex story

मैं उसके सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसकी आंखें मेरी चूचियों पर टिकी थीं। मैंने पहले अपनी चूचियां उसके मुंह के पास ले जाकर रगड़ीं। उसने उत्सुकता से मुंह खोला और निप्पल को चूसने लगा। मैंने उसके सिर को सहलाया, बालों में उंगलियां फेरती रही। फिर धीरे-धीरे नीचे सरकी। उसकी कमीज उतारी, उसकी छाती पर किस करने लगी। जीभ से उसकी निप्पल घुमाई, हल्का सा काटा। वह सिहर उठा, उसकी सांसें तेज हो गईं।

मैं और नीचे गई। उसका लंड मेरे चेहरे के सामने था। मैंने पहले हाथ से सहलाया, ऊपर-नीचे किया। फिर जीभ से सिरे को चाटा। धीरे-धीरे मुंह में लिया। गहराई तक ले गई, जीभ से चारों तरफ घुमाती रही। वह कराह रहा था, “भाभी… आह…” मैंने तेजी बढ़ाई, मुंह से चूसते हुए हाथ से अंडकोष सहलाए। उसका लंड मेरे मुंह में और सख्त हो गया। मैंने कुछ मिनट तक ब्लोजॉब दिया, उसे पागल करने के लिए। जब लगा कि वह ज्यादा उत्तेजित हो गया है, तब मैंने मुंह निकाला और मुस्कुराई। Village bhabhi chudai sex story

“अब मेरी बारी,” मैंने कहा। मैं चटाई पर लेट गई, पैर फैलाए। उसने मेरे ऊपर झुककर पहले मेरी चूचियां फिर से चूसीं। मैंने उसे गाइड किया, “जोर से चूसो… हां ऐसे…” फिर उसकी जीभ मेरे पेट पर, नाभि में घुमाई। मैंने उसका सिर नीचे दबाया। वह मेरी जांघों पर किस करने लगा। मैंने पैर और फैलाए। उसने मेरी चूत पर जीभ रखी। पहले हल्के से चाटा, फिर जीभ अंदर डालने की कोशिश की। मैंने कमर उठाकर कहा, “क्लिटोरिस पर… हां वहां… तेज…” वह सीख रहा था। मैंने उसके सिर को पकड़कर सही जगह पर दबाया। मेरी चूत से रस बहने लगा। मैं कराह रही थी, लेकिन आवाज दबा रही थी। Village bhabhi chudai sex story

काफी देर तक फोरप्ले चला। मैंने उसे ऊपर खींचा। अब मैं तैयार थी। उसने लंड हाथ में पकड़ा, मेरी चूत पर रखा। लेकिन पहली बार में सही जगह नहीं लग रहा था, इधर-उधर जा रहा था। मैंने हाथ बढ़ाया, उसके लंड को पकड़ा। अपनी चूत की दरार पर सही से सेट किया, सिरे को थोड़ा अंदर लिया। फिर बोली, “अब मार… जोर से।”

उसने एक जोरदार धक्का दिया। पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया। मुझे गहरा सुकून मिला। चूत पूरी भर गई, दीवारें तनी हुईं।

फिर वह जोर-जोर से चोदने लगा। हर धक्के में तेजी बढ़ती गई। मैं गांड उठा-उठाकर उसका हर धक्का सहेज रही थी, मिला रही थी। कभी मैंने अपनी टांगें उसके कंधों पर रख दीं, गहराई बढ़ गई। लंड मेरी चूत की गहराई तक जा रहा था, बाहर निकलता और फिर पूरी ताकत से अंदर। मेरी चूत से रस बह रहा था, चटाई गीली हो रही थी। मैंने बीच-बीच में उसे किस किया, उसके कान में फुसफुसाई, “और तेज… हां ऐसे…” Village bhabhi chudai sex story

इस बार वह ज्यादा देर टिका। करीब 45 मिनट तक लगातार चोदता रहा। मैं दो-तीन बार जोर से झड़ चुकी थी। हर झड़ने पर शरीर कांप जाता, मुंह से आह निकलती लेकिन मैं दबाकर रखती क्योंकि चाची बाहर सो रही थीं। बहुत आनंद आया, पहले से कहीं ज्यादा। उसकी स्टैमिना बढ़ गई थी, या शायद रात का माहौल।

इसके बाद शशांक मुझे रोज चोदने लगा। हर दिन कोई न कोई बहाना बनाकर वह मेरे घर आ जाता। कभी कहता कि किताब लौटाने आया हूं, कभी पानी पीने, कभी बस बात करने। लेकिन जैसे ही दरवाजा बंद होता, हम एक-दूसरे पर टूट पड़ते।

कभी दिन में चुपके से, जब सास बाहर होतीं या सो रही होतीं। कभी रात को खिड़की से पत्थर फेंककर मुझे जगाता और मैं पीछे का दरवाजा खोल देती। हम चटाई पर, कभी खटिया पर (जब चाची न होतीं), कभी आंगन के कोने में भी। वह पहले से ज्यादा आत्मविश्वास वाला हो गया था। मैं उसे हर नई चीज सिखाती—कभी मैं ऊपर चढ़कर स्वयं चुदाई करती, कभी घोड़ी बनकर, कभी पैर कंधों पर रखकर गहराई तक। उसकी स्टैमिना बढ़ती गई, अब वह 30-40 मिनट आसानी से टिक जाता। मैं हर बार दो-तीन बार झड़ती, कभी ज्यादा भी। मेरी चूत उसकी आदत पड़ गई थी। Village bhabhi chudai sex story

करीब तीन महीने तक यह सिलसिला चलता रहा। रोज रोज, बिना रुके। मैं खुश थी, संतुष्ट थी, लेकिन अंदर ही अंदर डर भी लगने लगा था।

तीसरे महीने की शुरुआत में मुझे मासिक धर्म नहीं हुआ। पहले दिन सोचा शायद देर हो रही है। दूसरे दिन भी नहीं। तीसरे दिन दिल धक-धक करने लगा। मैं डर गई। गांव-समाज था, यहां हर छोटी बात फैल जाती। अगर किसी को पता चल गया तो इज्जत का सवाल था। सास, पड़ोसी, सब कुछ पूछने लगते। मैं रातों को सो नहीं पाती थी।

मैंने सोचा कुछ करना होगा। मैंने बीमार होने का नाटक शुरू कर दिया। सुबह उठकर कमजोर दिखने लगी, खाना कम खाने लगी, चेहरा पीला कर लिया। सास से कहा कि पेट में दर्द है, सिर चकरा रहा है। सास ने पूछा क्या हुआ, मैंने कहा कुछ नहीं, बस थकान है। लेकिन अंदर से डर रही थी।

फिर मैंने पड़ोस की चाची से पति को फोन करवाया। चाची ने फोन लगाया और कहा कि मीरा बीमार है, तुम आ जाओ। पति ने कहा ठीक है, तीन-चार दिन में आ जाता हूं।

वह तीन-चार दिन में गांव पहुंच गया। मुझे देखकर चिंता हुई। मैं बिस्तर पर लेटी रहती, कमजोर दिखती। वह मेरे पास बैठता, हाथ पकड़ता, पूछता क्या हुआ। मैं ठीक होने का नाटक करती रही। धीरे-धीरे “ठीक” होने लगी। उसने मुझे दवा दिलवाई, खाना खिलाया। Village bhabhi chudai sex story

उन दिनों में पति ने मुझे कई बार चोदा। मैंने विरोध नहीं किया। मुझे लगा कि अगर पति से चुदी तो शक कम होगा। मैंने उससे पूरी तरह चुदी, जैसे पहले चुदी करती थी। वह खुश था, सोचता था कि मैं ठीक हो रही हूं।

अगले महीने जब मासिक फिर नहीं हुआ, मैंने पति से कहा, “मुझे लगता है मैं मां बनने वाली हूं।” उसकी आंखें चमक उठीं। वह बहुत खुश हुआ। बोला, “सच में? कितना अच्छा है!” उसने सबको बताया, गांव में खुशी मनाई गई।

लेकिन बच्चा शशांक का था। मेरे पेट में जो बड़ा हो रहा था, वह शशांक के लंड से आया था। लेकिन मैंने सबको पति के नाम कर दिया। पति को लगा उसकी पहली संतान है। मैं चुप रही। समाज में सब ठीक रहा। बच्चा हुआ तो पति का नाम पड़ा।

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