Sasur ne bahu aur devrani ko choda ससुर ने बहू और देवरानी को एक साथ चोदा पूरी कहानी

Sasur ne bahu aur devrani ko choda ससुर ने बहू और देवरानी को एक साथ चोदा पूरी कहानी

Sasur ne bahu aur devrani ko choda ससुर ने बहू और देवरानी को एक साथ चोदा पूरी कहानी

रात की स्याही गाँव की हवेली पर छाई हुई थी। चारों तरफ खेतों में सरसों के पीले फूल हल्की हवा में लहरा रहे थे, लेकिन अंदर का माहौल कुछ और ही था। मैं राधिका हूँ। मेरी उम्र अट्ठाईस साल, शादी को छह साल हो चुके हैं। मेरा पति अजय दिल्ली में नौकरी करता है, महीने में एक-दो बार आता है। घर में अब सिर्फ ससुर जी रामलाल और नई देवरानी पूजा रहते हैं। यह स्टोरी आप पढ़ रहे हैं sexstoryqueen.com पर | Sasur ne bahu aur devrani ko choda

पूजा की शादी को अभी चार महीने भी नहीं हुए। वो बीस-बाईस की होगी, लेकिन बदन में वो परिपक्वता है जो देखकर मन डोल जाता है। गोरी चिट्टी त्वचा, भरी हुई चूचियाँ जो साड़ी के ब्लाउज में मुश्किल से समा पाती हैं, कमर पतली और गांड गोल-मटोल। वो शर्मीली है, लेकिन जब अकेले में बात करती है तो आँखों में एक चमक आ जाती है।

ससुर जी रामलाल की उम्र पचपन के आसपास है। लेकिन उनका बदन अभी भी मजबूत है। खेती-बाड़ी करते हैं, सुबह शाम खेतों में रहते हैं। सास जी के जाने के बाद से घर में एक अजीब-सी खामोशी है। ससुर जी दिन भर काम में व्यस्त रहते हैं, लेकिन रात को जब सब सो जाते हैं, उनकी आँखें हम दोनों पर टिक जाती हैं। मैंने कई बार महसूस किया है कि जब मैं कपड़े बदलती हूँ या नहाकर निकलती हूँ, उनकी नजरें मेरे बदन पर रुक जाती हैं। पहले तो मुझे गुस्सा आता था, लेकिन धीरे-धीरे वो नजरें मुझे अजीब-सी गुदगुदी देने लगीं। पूजा को भी मैंने देखा है—वो भी शरमाती है, लेकिन कभी विरोध नहीं करती। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

उस रात सर्दी बहुत तेज थी। पाला पड़ रहा था। बिजली कई घंटों से गई हुई थी। लालटेन की पीली रोशनी में घर का आँगन रोशनी से भर रहा था। मैं और पूजा रसोई में बैठे थे। चूल्हे पर चाय उबल रही थी। पूजा ने धीरे से कहा, “भाभी, आज ससुर जी कुछ उदास लग रहे थे। पूरे दिन खेत से लौटकर चुप-चुप रहे।” मैंने मुस्कुराकर कहा, “अकेलेपन का असर है पूजा। सास जी नहीं हैं, बेटे दोनों शहर में। हम दोनों ही तो हैं उनके साथ।” पूजा ने नजरें झुकाकर कहा, “हाँ भाभी… लेकिन कभी-कभी उनकी नजरें… मुझे डर लगता है।” मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, “डरने की क्या बात है? वो हमारे ससुर हैं।” Sasur ne bahu aur devrani ko choda

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लेकिन अंदर मैं जानती थी कि वो डर नहीं, कुछ और था। रात के करीब बारह बजे हम दोनों अपने कमरों में चले गए। मेरा कमरा आँगन की तरफ था। मैं कंबल ओढ़कर लेट गई, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। ठंड से बदन काँप रहा था। बाहर से लकड़ियों की चटकने की आवाज आ रही थी—शायद ससुर जी आग जला रहे थे। अचानक दरवाजे पर हल्की खटखटाहट हुई। मैं उठी, दरवाजा खोला तो ससुर जी खड़े थे। लंबा कोट पहने, हाथ में लालटेन। “राधिका, ठंड बहुत है। आँगन में आग जला रहा हूँ। आ जा, थोड़ी देर बैठकर गर्म हो जा।” उनकी आवाज में एक अजीब-सी गहराई थी। मैंने हाँ कहा, शॉल ओढ़कर बाहर निकल आई। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

आँगन में आग जल रही थी। लपटें ऊपर उठ रही थीं। पूजा भी वहाँ बैठी थी। शायद ससुर जी ने उसे पहले बुलाया था। हम तीनों आग के इर्द-गिर्द बैठ गए। सन्नाटा था। सिर्फ लकड़ियों की फटने की आवाज और हमारी साँसें। ससुर जी ने हुक्का गुड़गुड़ाया, फिर धीरे से बोले, “दोनों बहुएँ इतनी सुंदर हैं। घर में रोशनी है तुम दोनों की वजह से। लेकिन मैं अकेला हूँ। सास तुम्हारी माँ जैसी थीं, लेकिन अब…” उनकी आवाज रुक गई। पूजा ने नजरें नीची कर लीं। मैंने कहा, “ससुर जी, आप अकेले नहीं हैं। हम हैं ना।” Sasur ne bahu aur devrani ko choda

 

ससुर जी ने मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में वो चमक थी जो मैं पहले भी देख चुकी थी। उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया। गर्माहट फैली। “राधिका, तू समझती है मेरी बात।” उनका हाथ धीरे-धीरे मेरी कमर की तरफ सरका। मैं सिहर गई, लेकिन हटाई नहीं। पूजा देख रही थी। ससुर जी ने उसे भी पास खींचा। “पूजा, तू भी तो मेरी बेटी जैसी है। लेकिन अब बहू है। विक्रम दूर है, तेरी भी जरूरतें होंगी न?” पूजा की साँसें तेज हो गईं। वो कुछ नहीं बोली, बस नजरें झुकाए रही। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

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वो पल जैसे जादू सा था। ससुर जी ने मुझे अपनी गोद में खींच लिया। उनका हाथ मेरे ब्लाउज के नीचे गया। मेरी चूचियाँ दबाईं—जोर से। “आह… ससुर जी…” मेरी आवाज निकल गई। वो गर्म थीं, भारी। ससुर जी ने कहा, “कितनी नरम हैं तेरी चूचियाँ राधिका। सालों से छूने को जी चाहता था।” पूजा करीब आई। ससुर जी ने उसके होंठ चूम लिए। पूजा ने हल्का सा विरोध किया, लेकिन फिर आँखें बंद कर लीं। ससुर जी ने मेरे होंठ भी चूमे। उनकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। “दोनों की चूत आज मेरी है। दोनों को एक साथ चोदूँगा।” Sasur ne bahu aur devrani ko choda

 

हम अंदर बड़े कमरे में चले गए। लालटेन जल रही थी। ससुर जी ने दरवाजा बंद किया। हमने कपड़े उतारे। मैं और पूजा नंगी खड़ी थीं। ससुर जी का लंड खड़ा था—बहुत मोटा, लंबा, सिर लाल। पूजा की आँखें फैल गईं। “ससुर जी… इतना बड़ा…” ससुर जी हँसे, “हाँ बेटी, तेरी चूत के लिए ही तो रखा है।” उन्होंने पूजा को बिस्तर पर लिटाया। उसकी टाँगें फैलाईं। पूजा की चूत पर हल्के बाल, गुलाबी, गीली हो चुकी थी। ससुर जी ने जीभ डाली। पूजा की कमर उठ गई। “आह… ससुर जी… कितना अच्छा… और चाटिए…” वो सिसकार रही थी। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

मैं पास खड़ी देख रही थी। मेरा बदन जल रहा था। ससुर जी ने मुझे बुलाया। “राधिका, आ। पूजा की चूत चाट।” मैंने झुककर चाटना शुरू किया। पूजा की चूत गीली, मीठी। उसकी सिसकारियाँ बढ़ गईं। ससुर जी ने पीछे से मेरा पल्लू खींचा। मेरी गांड पकड़ी, दबाई। “तुम दोनों की गांड कितनी गोल है। आज दोनों में डालूँगा।” उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा। मैं काँप उठी। “ससुर जी… धीरे…” लेकिन वो धक्का मारकर अंदर चले गए। दर्द हुआ, लेकिन मजा भी। “आह… कितना मोटा है आपका लंड…” मैं कराह रही थी। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

 

ससुर जी धीरे-धीरे धक्के मारने लगे। पूजा मेरे होंठ चूस रही थी। मैं उसकी चूचियाँ दबा रही थी। ससुर जी ने कहा, “पूजा, आ जा। मेरे लंड को चूस।” पूजा ने झुककर चूसना शुरू किया। मेरा मन पागल हो रहा था। ससुर जी ने हमें पोजिशन बदली। अब पूजा ऊपर थी। ससुर जी नीचे लेटे, पूजा उनकी गोद में। मैं पूजा की चूत चाट रही थी जबकि ससुर जी का लंड पूजा की चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। पूजा चीख रही थी, “ससुर जी… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” ससुर जी ने मेरी गांड में उंगली डाली। मैं सिहर उठी। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

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रात भर यही सिलसिला चला। कभी ससुर जी मुझे पीछे से पकड़कर चोदते, पूजा नीचे लेटी उनकी गेंदें चूसती। कभी पूजा को कुत्ते की तरह चोदते, मैं उनके मुंह में अपनी चूत देती। ससुर जी की ताकत कम नहीं हो रही थी। वो हमें थका रहे थे। “दोनों की चूत कितनी गरम है… आह… पानी आने वाला है…” आखिरकार उन्होंने पहले पूजा में झड़ दिया। गरम पानी पूजा की चूत में भर गया। फिर मुझे पलटा, मेरी चूत में डाला और जोर से झड़ गए। हम तीनों थककर लेट गए। पूजा मेरे सीने पर सिर रखे, ससुर जी बीच में। उनकी साँसें अभी भी तेज थीं। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

सुबह होने से पहले ससुर जी ने कहा, “ये हमारा राज रहेगा। लेकिन जब मन करे, मैं बुलाऊँगा। तुम दोनों तैयार रहना।” हमने चुपचाप हाँ में सिर हिलाया। वो रात हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई। अब जब अजय और विक्रम शहर जाते हैं, हम दोनों ससुर जी के कमरे की तरफ देखती हैं। वो आग कभी नहीं बुझती। कभी-कभी वो हमें अलग-अलग बुलाते हैं, कभी साथ। लेकिन वो पहली रात की याद हमेशा ताजा रहती है—वो गर्माहट, वो चाहत, वो अपराध और वो मजा जो हमें बाँधे रखता है। Sasur ne bahu aur devrani ko choda

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